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shamshera movie review in hindi


'शमशेरा' की कहानी

राजपूतों के दौर में उनके साथ मुगलों से लोहा ले चुके खमेरन जाति के लोग आसरे की तलाश में काजा पहुंचे, तो वहां के ऊंची जाति के लोगों ने स्वीकार नहीं किया। तब उनके सरदार शमशेरा (रणबीर कपूर) ने अपने साथियों के साथ मिल कर गुजर-बसर के लिए काजा में लूटपाट शुरू कर दी। काजा के लोगों ने अंग्रेजों के दरबार में खमेरन के खिलाफ गुहार लगाई। तब सरकार ने दरोगा शुद्ध सिंह (Sanjay Dutt) को भेजा, जो शमशेरा और उसके साथियों को धोखे से काजा के किले में गुलाम बना लेता है।

एक्टिंग
परफॉर्मेंस के लिहाज से ये रणबीर की बेहतरीन फिल्म है. रणबीर ने शमशेरा और बल्ली के रोल में जान डाल दी है. अब तक रणबीर को हमने चॉकलेटी अंदाज में देखा है यहां रणबीर ने एक्सपेरिमेंट किया है और वो इसमें पूरी तरह से कामयाब रहे हैं. रणबीर का ये अंदाज काफी हैरान करता है और रणबीर एक बार फिर से आपको अपनी एक्टिंग का मुरीद बना लेते हैं. संजय दत्त शुद्ध सिंह के किरदार में काफी खौफ पैदा करते हैं. उनका लुक कमाल का है. वाणी कपूर का रोल छोटा है लेकिन वाणी ने अच्छा काम किया है. सौरभ शुक्ला ने कमाल की एक्टिंग की है.

स्क्रीनप्ले लिखा है एकता पाठक मल्होत्रा और करण मल्होत्रा ने। इस स्क्रीनप्ले में न कोई उतार-चढ़ाव हैं और न मनोरंजन। शमशेरा का बदला उसका बेटा बल्ली लेना चाहता है, लेकिन उसे दर्शकों का साथ नहीं मिलता क्योंकि शमशेरा वाला हिस्सा बहुत ज्यादा जल्दबाजी में निपटाया गया है। उसके साथ हुए अन्याय का दु:ख दर्शकों को महसूस नहीं होता। शमशेरा को अंग्रेज धोखा देते हैं, लेकिन यहां पर देशभक्ति का कोई जज्बा ही पैदा नहीं किया गया है। कहने का मतलब ये कि फिल्म में कोई इमोशन ही नहीं है। हीरो की खुशी और दु:ख को दर्शक महसूस ही नहीं कर पाते। 
फिल्म के किरदार कई जगह मूर्खताएं करते नजर आते हैं। बल्ली को पकड़ने निकला शुद्ध सिंह के हाथ बल्ली की पत्नी सोना (वाणी कपूर) लगती है। वह उसे पकड़ कर छिपे हुए बल्ली को बाहर निकलवा सकता था, लेकिन वह ऐसा करता ही नहीं। क्यों? ये तो स्क्रिप्ट राइटर ही बता सकते हैं। 

करीब पौने तीन घंटे लंबी इस फिल्म को एडिटिंग टेबल पर कम से कम आधा घंटा कम किया जा सकता था। अगर 'शमशेरा' को 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' और 'केजीएफ' का पसंद नहीं आने वाला कॉकटेल कहा जाए, तो गलत नहीं होगा

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